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Sunday, 7 October 2018

एआईआईईए परिपत्र 17/2018 दिनांक 03 अक्टूबर 2018

भोपाल डिवीजन इंश्योरेंस एम्प्लाईज यूनियन
(सीजेडआईईए द्वारा एआईआईईए से सम्बद्ध)
पंजीयन क्रमांक 3544
परिपत्र क्रमांक 11/2018        दिनांक: 05 अक्टूबर 2018
भोपाल मण्डल के सभी साथियों को:
प्रिय साथियों,
एआईआईईए की निगम अध्यक्ष से मुलाक़ात 
हम 01 अक्टूबर 2018 को एआईआईईए की निगम अध्यक्ष से मुलाक़ात के विषय में 03 अक्टूबर 2018 को जारी परिपत्र 17/2018 का अनुवाद कर प्रस्तुत कर रहें है।  
अभिवादन के साथ,
  आपका साथी 

  महामंत्री 

(एआईआईईए परिपत्र 17/2018 दिनांक  03 अक्टूबर 2018)  
प्रिय साथी, 
एलआईसी अध्यक्ष के साथ चर्चा
एआईआईईए के अध्यक्ष अमानुल्ला खान और महासचिव वी रमेश ने 1 अक्टूबर, 2018 को एलआईसी केंद्रीय कार्यालय का दौरा किया और कर्मचारियों और संस्थान से संबंधित कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर एलआईसी अध्यक्ष श्री वी.के. शर्मा के साथ चर्चा की। चर्चा के दौरान प्रबंध निदेशक श्री हेमंत भार्गव, कार्यकारी निदेशक (कार्मिक) द्वय श्री शरद श्रीवास्तव और श्री मुकेश कुमार गुप्ता, चीफ(कार्मिक) श्री जी.एस. वानवार, सचिव (कार्मिक) श्रीमती अरुणा सेठ और कार्मिक व औद्योगिक संबंध विभाग के अन्य अधिकारी उपस्थित थे। 
वेतन संशोधन 
एआईआईईए ने वेतन संशोधन, जो 1.8.2017 को देय हो चुका है, पर वार्ता शुरू करने में देरी पर अपनी नाखुशी व्यक्त की। हमने बताया कि एआईआईईए द्वारा प्रस्तुत मांग पत्र (चार्टर) कर्मचारियों की उम्मीदों और आकांक्षाओं को प्रतिबिंबित करता है और संस्था की वित्तीय ताकत के वास्तविक आधार पर मांगों को प्रस्तुत करता है। वार्ता शुरू करने में देरी गंभीर अशांति पैदा कर रही है और इसलिए बातचीत को प्रारम्भ करने व जल्द से जल्द मांगों को सुलझाने के लिए तत्काल कदम उठाए जाने चाहिए। निगम अध्यक्ष ने बताया कि एआईआईईए और अन्य यूनियनों द्वारा प्रस्तुत चार्टर का विश्लेषण किया गया है और सरकार को पेश कर दिया गया है। एलआईसी इस संबंध मे दिशानिर्देश के लिए सरकार से पहल कर रही है। उन्होने कहा की एलआईसी फिर से सरकार के पास जाएगी और इस मुद्दे पर जल्द वार्तालाप प्रारम्भ करने की आवश्यकता पर ज़ोर देगी। एआईआईईए ने स्पष्ट किया कि एलआईसी को यह सुनिश्चित करना होगा कि सरकार से कोई भी आदेश एलआईसी की वित्तीय ताकत पर आधारित होना चाहिए, न कि बाहरी घटनाक्रम पर। निगम अध्यक्ष एआईआईईए के इन विचारों के साथ सहमत हुए। 
पेंशन विकल्प 
हमने लंबे समय से लंबित इस मांग के अनुकूल समाधान के महत्व पर बल दिया। एआईआईईए ने इस मांग के पक्ष में अपने तर्क दोहराए। अध्यक्ष ने सहमति व्यक्त की कि यह एक न्यायोचित और वैध मांग है और विभिन्न कठिनाइयों के बावजूद एलआईसी एक अनुकूल निर्णय के लिए मंत्रालय के समक्ष आगे पहल कर रहा है। एआईआईईए ने रिजर्व बैंक में हुई प्रगति की ओर इशारा किया जहां सरकार ने पेंशन को अद्यतन करने और अंतिम विकल्प पर नई सिफारिश मांगी है। हमने अध्यक्ष को सूचित किया कि हमारे स्रोतों के अनुसार, रिजर्व बैंक पेंशन के समय-समय पर अद्यतन और एक और विकल्प की मांग, दोनों को स्वीकार करने के लिए मजबूत सिफारिश भेज रहा है। इन घटनाक्रमों के प्रकाश में, एलआईसी को हमारी मांगों पर सरकार के समक्ष जोरदार पहल करना चाहिए। अध्यक्ष ने कहा कि वह इस मुद्दे पर वित्त मंत्री और मंत्रालय के अधिकारियों के साथ व्यक्तिगत रूप से चर्चा कर रहे हैं और अनुकूल समाधान खोजने के लिए प्रयास में कोई कमीं नहीं होगी। 
एआईआईईए ने पेंशन योजना में भी कुछ सुधार लाने की आवश्यकता को भी रेखांकित किया। हमने कहा कि रिजर्व बैंक और सरकार की तर्ज पर पारिवारिक पेंशन की दर संशोधित की जानी चाहिए और पेंशन निर्धारित करने का आधार 10 महीने के वेतन के औसत के बजाय अंतिम लिया गया वेतन होना चाहिए। इन दोनों मांगों पर निगम अध्यक्ष की प्रतिक्रिया सकारात्मक थी। 
एआईआईईए ने इस तथ्य पर अपना असंतोष व्यक्त किया कि 1.8.1997 से पहले सेवानिवृत्त होने वालो को महंगाई भत्ते के पूर्ण निष्प्रभावीकरण पर दिल्ली उच्च न्यायालय के आदेश को लागू करने एलआईसी ने उसकी भावना को लागू करने के बजाय कागजी काम भर किया है। माननीय उच्च न्यायालय ने 1.8.1997 से पहले सेवानिवृत्त जनों के लिए महंगाई भत्ते के भुगतान में भेदभाव को पहचाना। हमने बताया कि यह संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन है। लेकिन दुर्भाग्यवश अदालत ने इस भेदभाव को हटाने के लिए अपनी ही पद्धति रख दी जो इच्छित उद्देश्य को ही पूरा नहीं करती है। एलआईसी को इस अवसर का इस्तेमाल निर्णय की भावना को स्वीकार करके लेना चाहिए था, लेकिन दुर्भाग्यवश ऐसा नहीं किया गया। एआईआईईए ने कहा कि अनावश्यक मुकदमेबाजी का दृष्टिकोण छोड़ दिया जाना चाहिए और एलआईसी को एक महान संस्था बनाने के लिए सेवानिवृत्त जनों द्वारा किए गए वृहद  योगदान को स्वीकार कर पेंशनभोगियों की मांगों का समाधान करना चाहिए।   
नई भर्ती
एआईआईईए ने सहायक और अधीनस्थ कर्मी संवर्गों में तत्काल नई भर्ती की आवश्यकता पर बल दिया। अंतिम भर्ती 1993 में हुई थी और अब औसत उम्र के 50 छूने के चलते संस्था के भविष्य पर गंभीर प्रभाव पड़ रहे है। अध्यक्ष ने सहमति व्यक्त की कि भर्ती आवश्यक है लेकिन सूचित किया कि कुछ कानूनी मुद्दों को हल किया जाना है। हमने कहा कि अगर एलआईसी गंभीर रूप से समाधान की तलाश करे तो कानूनी मुद्दों का हल ढूंढना संभव है; लेकिन इस आधार पर, नई भर्ती में अब और देरी नहीं हो सकती है। अध्यक्ष ने कार्मिक विभाग को भर्ती की ओर आगे जाने के लिए तरीकों का पता लगाने की सलाह दी और एआईआईईए को आश्वासन दिया कि इस मुद्दे पर एलआईसी बहुत गंभीर है और इस दिशा में हर संभव कदम उठाएगी। 
अन्य मामले
एआईआईईए ने उच्च लागत वाले इलाज पर एक्स ग्रेशिया राशि 50 लाख रुपये तक बढ़ाए जाने का स्वागत किया। एआईआईईए ने मांग की कि एक्स ग्रेशिया की यह बढ़ी हुई राशि सभी कर्मचारियो के लिए लागू होनी चाहिए भले ही मेडीक्लेम योजना में उनकी बीमित राशि कितनी भी हो।  हमने उन पेंशनभोगियों और पारिवारिक पेंशनरों को, जो वर्तमान में मेडिक्लेम योजना के बाहर हैं, योजना में शामिल होने के विकल्प की हमारी मांग के समाधान का भी आग्रह किया। एआईआईईए ने पूर्व सैनिकों के वेतन निर्धारण पर अनुचित निर्देशों की भी उठाया और कहा कि रोजगार अनुबंध की शर्तों को पिछली तिथी से नहीं बदला जा सकता। एआईआईईए ने सुझाव दिया कि एलआईसी-एचएफएल द्वारा आवास ऋण पर लगाए गए ब्याज दर में कमी की हमारी मांग पर गंभीरता से पहल की जानी चाहिए। हमने खेल नीति की समीक्षा के वादे में देरी पर निराशा व्यक्त की और मांग की कि यह कार्य तत्काल किया जाना चाहिए। इन मुद्दों के अलावा पीएलएलआई आदि जैसे कई अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों पर भी चर्चा की गई। एआईआईईए इन मुद्दों को जोरदार तरीके से आगे बढ़ाना जारी रखेगा। 
निवेश के निर्णय 
हमने बताया कि एलआईसी के कुछ निवेश निर्णयों ने मीडिया में व्यापक आलोचना को आकर्षित किया है और पॉलिसीधारकों के कल्याण और बीमा धन की सुरक्षा पर संदेह उठाए जा रहे हैं। यह नकारात्मक धारणा एलआईसी की छवि को चोट पहुंचा रही है। निहित स्वार्थ स्थिति का उपयोग एलआईसी के निजीकरण की मांग के लिए भी कर रहे हैं। एआईआईईए ने कहा कि एलआईसी को इस गलतफहमी को दूर करना होगा और पॉलिसीधारकों को आश्वस्त करना होगा कि इस महान संस्थान के साथ उनके हित सुरक्षित है। 
निगम अध्यक्ष ने बताया कि निवेश के सभी निर्णयों को पॉलिसीधारकों और संस्थान के हितों को सबसे ऊपर रखकर लिया जाता है। एलआईसी की दृढ़ राय है कि व्यवसाय के अवसरों का विस्तार करने और बाजार प्रभुत्व बनाए रखने में एक बैंकिंग अंग जबरदस्त सहायक होगी। एलआईसी ने आईडीबीआई की ताकत और कमजोरियों का जोरदार मूल्यांकन किया है और यह आश्वस्त है कि यह समझौता एलआईसी के अंतर्गत प्रबंधकीय नियंत्रण के आने के साथ दोनों संस्थानों के लिए फायदेमंद होगा। इन्फ्रास्ट्रक्चरल लीज़िंग एंड फ़िनान्सियल सर्विसेज(आईएल एंड एफएस) के मुद्दे पर, अध्यक्ष ने बताया कि इसमें एलआईसी का निवेश जोखिम बहुत कम है। यूटीआई के पुनर्गठन से संबंधित ऐतिहासिक कारणों के चलते ही एलआईसी सबसे बड़ा शेयरधारक बन गया है। फंड  के मामले में, इसमें इक्विटी होल्डिंग बहुत छोटी सी है और इसमें ऋण जोखिम बहुत कम है। निगम अध्यक्ष ने बताया कि सरकार मानती है कि असफल होने के लिए आईएल एंड एफएस एक बहुत बड़ी संस्था है और इसलिए उसने सुधारात्मक कार्रवाई की ज़िम्मेदारी उठाई है। एलआईसी द्वारा अपनी इक्विटी होल्डिंग बढ़ाने के लिए राइट्स इश्यू में हिस्सेदारी आईआरडीए पर निर्भर करता है क्योंकि हमारी  इक्विटी होल्डिंग पहले से ही निर्धारित 15 प्रतिशत से अधिक है। निगम अध्यक्ष ने यह भी स्पष्ट किया कि एलआईसी आईएल एंड एफएस को कोई ऋण देने में इच्छुक नहीं है। 
हमने कहा कि आवश्यक है कि एलआईसी को गलतफहमी के वातावरण  को साफ़ कर देना चाहिए और सभी हितधारकों को आश्वस्त करना चाहिए कि उनके हित अच्छी तरह से संरक्षित हैं। हमने यह भी चेतावनी दी कि जबरदस्ती के कारण कोई निवेश निर्णय नहीं लिया जाए और सभी निर्णय पॉलिसीधारकों के लिए मूल्य संवर्धन और राष्ट्रीय कल्याण के एकमात्र उद्देश्य से लिया जाना चाहिए।
छपते छपते: उच्चतम न्यायालय द्वारा सीजीआईटी प्रकरण 27/1991 दिनांक 04.03.1991 पर दिए गए निर्णय के परिपालन की ओर केंद्रीय सरकार औद्योगिक न्यायपीठ को तीन माह के भीतर रिपोर्ट पेश करने को कहा गया है। इस विषय में एआईआईईए न्यायपीठ के समक्ष 29 अक्टूबर 2018 को अपना दावा पेश करेगी।

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