100 करोड़ वैक्सीन यानी एक अरब आबादी को डोज।
पूरी दुनिया की आबादी की का 1/7 भाग 9 महीने में इस लक्ष्य को छुआ। 31 अक्टूबर तक पहला डोज भारत के प्रत्येक नागरिक को दिए जाने का लक्ष्य था, जिसको आज मोदी सरकार के द्वारा पूर्ण कर लिया गया। भारत की 72% आबादी को पहला डोज लग चुका है, 32% आबादी को दोनो डोज लग चुके हैं। भारत सरीखे देश में जहां संसाधनों के नाम पर लोगों के पास बिजली तक उपलब्ध नहीं हो, सड़कें उपलब्ध नहीं हो वहां कोल्ड चेन बना करके, आम नागरिक तक व्यवस्थित तरीके से इंटरनेट पोर्टल पर सारी चीजों की व्यवस्था करके, वैक्सीन को प्रत्येक केंद्र तक पहुंचाना और उसका लेखा-जोखा रखना प्रत्येक नागरिक को डोज लगना और सारी व्यवस्था में कोई अराजकता ना होना अपने आप में अभूतपूर्व है।
*यह अभूतपूर्व तब और भी हो जाता है जब भारत में रहने वाले राष्ट्र विरोधी लोग इस वैक्सीन के अभियान के बारे में अफवाह फैलाते हैं, लोगों को भड़काते हैं, अपने राजनीतिक लाभ के लिए वैक्सीन की प्रक्रिया पर उंगली उठाते हैं और लोगों के दिलों दिमाग पर वैक्सीन के दुष्प्रभाव को स्थापित करने की कोशिश करते हैं।*
लेकिन फिर भी दृढ़ निश्चय मोदी के कारण से यह पूरा अभियान एक आंदोलन बन जाता है। लोग इसे राष्ट्र निर्माण से जोड़ते हैं और भारत के स्वाभिमानी नागरिक विपरीत परिस्थितियों में भी इन सारी चीजों को, सारी बाधाओं को दरकिनार करके अविश्वसनीय लक्ष्य को प्राप्त करते हैं।
दुनिया के सारे प्रबंधन संस्थान भारत की इस वैक्सीन कार्यप्रणाली को समझें अपने छात्रों को भेजें और अध्ययन करें कि भारत विविधताओं से भरा हुआ देश है, भारत जहां राष्ट्र विरोधी लोग खुलेआम देश के खिलाफ बोलते हों, भारत जहां वामपंथियों के द्वारा अराजकता फैलाने का पूरा षड्यंत्र किया जाता हो वहां एक अरब वैक्सीन के लक्ष्य को प्राप्त करना प्रबंधन के विद्यार्थियों के लिए एक अनुकरणीय उदाहरण है ।
मैं भारत के यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी का आभार व्यक्त करता हूं। उनके दृढ़ निश्चय के बिना यह अभियान सफल होना संभव नहीं था।

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