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Friday, 26 November 2021

Hindi version of AIRIEF Circular NO 62/OB-PST/2018-2022 dated November 23, 2021

(Hindi version of AIRIEF Circular NO 62/OB-PST/2018-2022 dated November 23, 2021)

 

समस्त पदाधिकारियों एवं सदस्यों के नाम

प्रिय साथी;

विधिक अध्यन समूह (LSG)तथा वार्ता समिति (NC) की भोपाल में 21 नवम्बर, 2021 को  संपन्न बैठक का ब्यौरा तथा लिए गए निर्णय

जैसा कि आपको विदित है बैठक का आयोजन भोपाल इकाई द्वारा किया गया था| श्री सुरेश केंदुलकर ने बैठक की कार्यावाही का संचालन किया विधिक अध्यन समूह में 3 नये सदस्य सर्व/श्री रमैय्या मूर्थी ( तंजावूर), दत्तात्रेय देशपांडे ( कोल्हापुर/पुणे) तथा कृष्णा मूर्ती (भोपाल) शामिल हुए तथा उन्होंने बहस में सक्रिय भाग लिया

श्री एस एस सक्सेना, अध्यक्ष, AIRIEF ने बैठक की आवश्यकता और पूर्व परिदृश्य पर प्रकाश डाला    

उन्होंने संगठन को विधिक सलाहकार समिति की आवश्यकता क्यों पड़ी तथा इसका गठन कैसे हुआ, इस पर विस्तार से प्रकाश डाला। प्रारंभ में, यह पेंशनभोगियों के मध्य व्याप्त असमानताओं ( inequalities) तथा असमता (disparity) से संबंधित समस्याओं के समाधान के लिये 2006 में गठित की गयी थी। AIRIEF के प्रथम महासचिव स्वर्गीय श्री सी एस मूर्ति ने कई परिपत्र जारी किए, वित्त मंत्रालय के अधिकारियों और मंत्रियों से मिलने के लिए दिल्ली भी गए। यहाँ तक कि वर्ष 2008 में भी AIRIEF कानूनी लड़ाई में पक्षकार नहीं था। जयपुर के श्री केएमएल अस्थाना, चंडीगढ़ के स्वर्गीय श्री एमएल गांधी और चेन्नई के श्री जीएन श्रीधरन ने जयपुर (29 याचिकाकर्ताओं द्वारा), चंडीगढ़ (27 याचिकाकर्ताओं द्वारा) और दिल्ली (सेवानिवृत्त वर्ग 1 अधिकारियों के संघ के सभी सदस्यों की ओर से) के उच्च न्यायालयों में रिट याचिकाएं दायर कीं थीं। 2015 तक, AIRIEF के सदस्यों ने महसूस किया कि AIRIEF को अपने नाम से याचिका दायर करनी चाहिए। यह जनवरी 2016 में जाकर संभव हो पाया और हमने AIRIEF की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता के द्वारा अपनी याचिका दाखिल कीइससे पहले, मई 2015 में, दिल्ली उच्च न्यायालय  ने उन सभी याचिकाकर्ताओं को 20% अंतरिम भुगतान करने का आदेश दिया था जो 01-08-1997 से पहले सेवानिवृत्त हुए थे। हमारे अधिवक्ता ने उस समय न्यायालय में जोर देकर कहा कि समान पद पर बैठे सभी व्यक्तियों को यह लाभ मिलना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने हमारे तर्क पर विचार किया और 31-03-2016 को सभी समान व्यक्तियों को 40% अंतरिम राहत भुगतान करने का आदेश दिया। उच्चतम न्यायालय ने यह आदेश भी दिया कि तीनों उच्च न्यायालय  से सभी याचिकाओं को नए सिरे से सुनवाई के लिए दिल्ली उच्च न्यायालय में स्थानांतरित किया जाए। दिल्ली उच्च न्यायालय ने अंतिम आदेश 27-04-2017 को सुनाया था, जिसमें अगस्त' 97 से पहले के पेंशनर्स को कुछ छोटे लाभ दिए गए थे।
 
हमने दिल्ली उच्च न्यायालय के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपनी  विशेष अनुमति याचिका (SLP) दायर की है। अब उच्चतम न्यायालय में इस मामले में 6 याचिकाकर्ता हैं।
 
आपको स्मरण होगा कि AIRIEF ने हैदराबाद, चेन्नई और चंडीगढ़ के रिटायर्ड क्लास वन आफिसर्स फेडरेशन/एसोसिएशन, और एआईआईपीए के साथ एक संयुक्त मोर्चा बनाया था जो कि  सभी पेंशनर्स के लाभ के लिए एक साथ मिलकर काम करने की ओर हमारी तरफ से उठाया गया  कदम था।
 
अब हम, AIRIEF में, तीन विशिष्ठ तरीकों से काम कर रहे हैं - कानूनी रूप से न्यायालय के माध्यम से, वित्त मंत्रालय और वित्तीय सेवा विभाग के साथ बातचीत के माध्यम से और संयुक्त कार्रवाई के माध्यम से। ये सारे प्रयत्न हमारी निम्न मांगों को प्राप्त करने के लिए हैं;
 
(i) 1-8-97 से पहले के सेवानिवृत्त लोगों के लिए महंगाई राहत दर की समानता
(ii) 30% फेमिली पेंशन बिना किसी सीमा के 
(iii) 80 वर्ष की आयु पार करने वालों को अतिरिक्त पेंशन
(iv) वेतन पुनर्निर्धारण पर पेंशन पुनर्निर्धारण 
(v) मृतक पेंशनर की 67 वर्ष की आयु तक फेमिली पेंशनर्स को पूर्ण पेंशन
(vi) 10 महीने के मूल वेतन या अंतिम आहरित मूल वेतन के आधार पर मूल पेंशन का निर्धारण, जो भी पेंशनर के लिए फायदेमंद हो।
उन्होंने आग्रह किया कि विमर्श का आधार उपरोक्त बिदु हों।
 
जी कृष्णा स्वामी, जीएस, हमारी मांगों पर ध्यान केंद्रित किया जाये
 
उन्होंने कहा कि उन मामलों के  विस्तार में जाये बिना जो हमारे कार्यों को दिशा नहीं दे सकते हैं, यह आवश्यक और समयोचित होगा कि हमारी मांगों को प्राप्त करने के लिए व्यावहारिक कदम उठाए जाएं। इसी आधार पर सुझाव देने के लिए विचार-विमर्श आमंत्रित हैं।
 
चर्चा का सारांश : प्रस्तुती श्री एम पी अग्निहोत्री, अध्यक्ष, विधिक अध्यन समूह   
 
मैं सभी प्रकार की असुविधाओं और बाधाओं का सामना करते हुए दूर-दराज के स्थानों से यात्रा करके बैठक में भाग लेने के लिए आए सदस्यों और विशेष आमंत्रितों के प्रति आभारी हूं। भोपाल मंडलीय इकाई के आयोजकों को धन्यवाद जिन्होंने ठहरने, भोजन और बैठक हॉल आदि की अच्छी व्यवस्था की है। यह बहुत संतोष की बात है कि बैठक सदस्यों को पूर्व में ही सूचित कर दिए गए एजेंडे पर ही काफी हद तक केंद्रित थी। बैठक में न्यायालय में चल रही कार्यावाही  के साथ-साथ हमने भाजीबीनि प्रबंधन तथा वित्त मंत्रालय और वित्तीय सेवा विभाग के साथ महत्वपूर्ण मुद्दों पर हुईं  नियमित और प्रभावी वार्ताओं पर भी विस्तार से चर्चा की है। दोस्तों, जैसा कि आप जानते हैं कि हमारे मुख्य मुद्दों पर हमने वित्त मंत्रालय और वित्तीय सेवा विभाग को व्यक्तिगत रूप से हमारे फेडरेशन द्वारा और साथ ही अन्य एसोसिएशन के साथ संयुक्त रूप से अनेक ऐसी महत्वपूर्ण जानकारियाँ और सूचनाएं दी हैं जो अन्यान कारणों से सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं थीं| ऐसी सभी सूचनाएं को उनके साथ संयुक्त बैठक में भी साझा किया गया था। न्यायालय में हमारे मामलों की स्थिति, न्यायालीन कार्यवाही में आ रहे गतिरोध, विभिन्न याचिकाकर्ताओं द्वारा न्यायालय में प्रस्तुत किये गए सारपत्र (Briefs) और संकलन (compilation) के मुख्य बिंदु (Sailent Points), हमारे और उनके द्वारा न्यायालय में प्रस्तुत सारपत्र (Briefs) और संकलन (compilation) में तालमेल के बिंदु तथा उनमें व्याप्त मतभेद और अंतर्विरोधों पर भी विस्तार से चर्चा की गई। भाजीबीनि प्रबंधन तथा वित्त मंत्रालय और वित्तीय सेवा विभाग के साथ वार्ता और न्यायायिक कार्यावाही के साथ साथ चलने के सवाल पर बैठक में सदस्य सहमत थे कि भाजीबीनि प्रबंधन तथा वित्त मंत्रालय और वित्तीय सेवा विभाग के साथ वार्ता और न्यायायिक कार्यावाही आपस में टकराव नहीं  हैं बल्कि वे एक दुसरे की पूरक हैं, इसलिए निर्णय लिया गया कि दोनों पहल को पूर्ण सोच-विचार के साथ संतुलन बनाते हुए जारी रखा जायेगा। जैसा कि हम सभी महसूस करते हैं, समय का महत्व है, इसलिए बैठक में फैसला लिया गया कि वित्त मंत्रालय और वित्तीय सेवा विभाग के साथ हमारी बातचीत जल्द से जल्द तेज होनी चाहिए। AIRIEF के अध्यक्ष और महासचिव प्रयास करेंगे कि वित्त मंत्रालय और वित्तीय सेवा विभाग के साथ बैठक की तारीख शीघ्र मिले ताकि हमारा प्रतिनिधिमंडल शीघ्र मिलकर हमारी मुख्य शिकायतों को जल्द से जल्द हल करवाने के लिए सटीक जानकारियां और सूचनाएं (Input) उन्हें प्रदान कर सके। वित्त मंत्रालय और वित्तीय सेवा विभाग के ध्यान में लाए जाने वाले बिंदुओं पर भी विस्तार से चर्चा की गई है ताकि एक सार्थक और प्रभावी वार्ता हो सके। न्यायिक मोर्चे पर निर्णय लिया गया कि AIRIEF के अध्यक्ष/ महासचिव हमारे अधिवक्ता के लगातार संपर्क में रहेंगे, उच्चतम न्यायालय  की कार्य पद्धति पर नजर रखेंगे, और पूरे परिप्रेक्ष्य को ध्यान में रखते हुए सुनवाई की तारीख शीघ्र प्राप्त करने के लिए जो भी कदम उठाने की आवश्यकता होगी, वैसे कदम उठायेंगे। विधिक अध्यन समूह वरिष्ठ अधिवक्ता को न्यायालीन मामले से संबंधित नवीनतम घटनाओं से अवगत कराने के लिए तैयार रहेगा। मित्रों, विचार-विमर्श का यह सार आप तक तुरंत सुचना पहुंचाने के लिए है। बैठक के मिनिट्स और सदस्यों द्वारा व्यक्त विचारों का विवरण शीघ्र ही तैयार किया जाएगा। AIRIEF यह सुनिश्चित करेगी कि अन्य एसोसिएशन के साथ तालमेल किया जाए और जहाँ भी आवश्यक हो संयुक्त कार्रवाई की जाये। बैठक ने उन सभी कार्यकर्ताओं के असीम योगदान को भी सराहा जो लगातार अपना समर्थन और सेवाएं संगठन को दे रहे हैं| बैठक ने विशेष रूप से श्री वी त्यागी जी के समर्थन की सराहना की।
 
बैठक में लिए गए निर्णय  
 
1. श्री आनंद वी त्यागी की अध्यक्षता में एक प्रतिनिधिमंडल वित्त मंत्री से मिलने का समय प्राप्त करने और उनसे मिलने के लिए गठित किया जायेगा।
2. विधिक अध्यन समूह तथा वार्ता समिति से  तीन व्यक्तियों को अध्यक्ष श्री सक्सेना द्वारा  उपरोक्त प्रतिनिधिमंडल में नामित किया जाएगा।
3. AIRIEF द्वारा हमारी मांगों पर प्रकाश डालते हुए वित्तमंत्री को सौपने के लिए एक ज्ञापन तैयार किया जायेगा।
4. हम सर्वोच्च न्यायालय में अपने कानूनी मामले पर पहल जारी रखते हुए, पारिवारिक पेंशन और 80 वर्ष की आयु पर अतिरिक्त पेंशन पर निर्णय के लिए केंद्र सरकार से पहल जारी रखेंगे।
5. व्यावहारिक कारणों से उच्चतम न्यायालय में चल रहे मामले का उल्लेख वार्ता अथवा ज्ञापन में नहीं किया जाना है।
6. साझा मुद्दों पर अपने संयुक्त मोर्चा के घटकों के साथ बने रहना है।
 
संगठनात्मक मामलों के बारे में, हम अगले परिपत्र में विवरण देंगे।
अभिवादन के साथ,
 
आपका शुभेच्छु 
 
(जी कृष्णा स्वामी)
महासचिव
 

           कृपया AIRIEF की वेबसाईट www.airiefvision.wordpress.com पर आयें

     (हिन्दी रूपांतरण : अरुण कान्त शुक्लाउपाध्यक्ष, AIRIEF द्वारा, रायपुर, 25 नवम्बर 2021)

 
               यह योगदान और बलिदान को पहचानने और सम्मान करने का समय है
 
 

 

 

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