मैं आपको मेरे साथ आप बीती सच्ची घटना बताने जा रहा हूँ
इस घटना को पड़ने के बाद आप लोगों का सिक्खो के प्रति नज़रिया बदल जायेगा और बदलना भी चाहिए। वाकई में सिक्खो ने साबित कर दिया की वो सदा ही मानवता की रक्षा करते आये है और आज भी सभी धर्मो के लिए समर्पित है
मैं अशोक अग्रवाल दिल्ली सरकारी कर्मचारी
अपनी फॅमिली अपनी दो बेटिया 21 वर्ष,24वर्ष और अपने छोटे बेटे
और अपनी पत्नी के साथ by रोड दिल्ली से अम्बाला अपने साले की बेटी की शादी में जा रहा था जैसे ही हम लोग सोनीपत से आगे पहुंचे तो हाइवे पर 30-35 उग्र लोगो की भीड़ ने हम लोगो को घेर कर कार से घसीट लिया हमारी कार जला दी मुझे मेरी पत्नी और मेरे बेटे को बहुत मारा। और मेरी दोनों बेटियो को उनकी अस्मत लूटने के लिए उठा कर ले जा रहे थे यही हाल एक और मल्होत्रा फॅमिली के साथ भी हो रहा था हम लोग बेबस हो गए थे लेकिन इतने में भगवान् का रूप बन कर 15 -20 के लगभग सिक्ख युवक आ गए
उन्होंने बल्कि उन दंगाइयों से मोर्चा लिया बल्कि हमारी बेटियों को बचा कर दंगाइयों को खदेड़ भी दिया। उनमे से एक सिक्ख युवक बहुत बुरी तरह से घायल भी हो गया था। हमारी कारें जल चुकी थी। उन्होंने हम लोगो को एक प्राइवेट वैन से पानीपत गुरूद्वारे पहुँचाया और हमारे साथ सुरक्षा के लिए कुछ सिक्ख युवक साथ में गए ।
गुरूद्वारे में हम लोगो का पूरा उपचार किया गया हमे खाना खिलाया गया कपड़े दिए गए और और हमे गुरूद्वारे में रुकने की व्यवस्था भी की गयी वहां पर पहले से ही और भी दंगा पीड़ित मौजूद थे उनकी भी पूरी सेवा की जा रही थी। अब महसूस होता है 1984 के दंगों का सिक्खो का दर्द क्या रहा होगा
उन दंगो में उस कौम के साथ गलत किया गया जो सदैव मानवता के लिए समर्पित थी और है
मैं मारा जाता तो कोई बात नही होती
लेकिन यदि मेरो बेटियो की इज़्ज़त लूट जाती तो क्या होता
मैं शुक्रगुज़ार हूँ सिक्खों का
जो कभी आरक्षण नही मांगते
ऐसी बहादुर और समर्पित कोम के सिक्खो को देश के शीर्ष स्थानो पर होना ही चाहिए ताकि हर ऐक देशवासी सुरक्षित तो रह सके ।
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