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Thursday, 21 September 2017

सुप्रीम कोर्ट ने वरिष्ठ वकीलों के मेंशनिंग करने पर लगाई रोक

BY  ON  

सुप्रीम कोर्ट में जरूरी मामलों की जल्द सुनवाई के लिए मेंशनिंग पर वकील पीवी दिनेश ने गलत तरीके से वरिष्ठ वकीलों द्वारा भेदभाव करने के मामले को उठाने के एक दिन बाद ही चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा ने साफ कर दिया कि वरिष्ठ वकीलों को सुबह के वक्त जरूरी मामलों/ नई अर्जी/ हस्तेक्षेप याचिका की मेंशनिंग की इजाजत नहीं होगी और सिर्फ AOR यानी एडवोकेट ऑन रिकार्ड ही ये मेंशनिंग कर पाएंगे।

आज चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा ने एक वरिष्ठ वकील को मेंशनिंग से मना करते हुए कहा कि ये क्या है ? नहीं  सॉरी। सिर्फ एडवोकेट ऑन रिकार्ड ही मेंशनिंग करेंगे।

दरअसल मंगलवार को चीफ जस्टिस की कोर्ट में वरिष्ठ वकीलों के लाइन को तोडने और गैर वरिष्ठ वकीलों के बीच कहासुनी हो गई थी। ये मेंशनिंग रोजाना शुरु के 20 मिनट ही चलती है। चूंकि चीफ जस्टिस सुप्रीम कोर्ट के प्रशासनिक हेड हैं इसलिए लिस्टिंग के लिए या टैगिंग आदि से लिए देश की पहली कोर्ट में ही मेंशनिंग की जाती है।

गौरतलब है कि मेंशनिंग की प्रथा कोई लिखित नियम नहीं है और बार के पुराने रिवाज के मुताबिक वरिष्ठ वकीलों को इससे बचना चाहिए। जस्टिस वैकेंटचलैया और जस्टिस अहमदी के चीफ जस्टिस बनने के वक्त वरिष्ठ वकीलों द्वारा मेंशनिंग परंपरा पर रोक लगी थी। इसके पीछे सोच ये थी कि जूनियर वकीलों को भी मौका मिले और वरिष्ठ वकील असली मुकदमों में हिस्सा लें। लेकिन बाद में कई वरिष्ठ वकीलों ने ये शुरु किया क्योंकि मेंशनिंग के लिए वो फीस भी लेने लगे। बिना किसी प्रयास चीफ जस्टिस के सामने केस की मेंशनिंग कर लाखों रुपये फीस लेने लगे। कई वरिष्ठ एक दिन में तीन से चार मामले लेने लगे।  चूंकि इस दौरान वरिष्ठ वकीलों को ही प्राथमिकता दी जाती रही तो मेंशनिंग का 20 मिनट का वक्त वरिष्ठ वकीलों द्वारा ही ले लिया जाता और जूनियर वकील काफी वक्त से लाइन में खडे होने के बावजूद वापस लौट जाते और अगले दिन दोबारा फिर से कोशिश करते।

मंगलवार को मेंशनिंग के वक्त लाइन में फंसे वकील दिनेश और चीफ जस्टिस के बीच कडे शब्दों का आदान प्रदान हुआ। दरअसल वकील ने वरिष्ठ वकीलों द्वारा मेंशनिंग का सारा वक्त लेने और गैर सीनियर वकीलों को मौका ना मिलने पर आपत्ति जाहिर की थी। वकील दिनेश ने कहा कि मेंशनिंग का सारा वक्त वरिष्ठ वकील और उनके मुव्वकिल ले लेते हैं एेसे में वो लोग पीछे रह जाते हैं जो वरिष्ठ वकीलों को फीस नहीं दे पाते और तय वक्त में मेंशनिंग नहीं कर पाते। वकील दिनेश ने चीफ जस्टिस को कहा कि वो 30 मिनट से लाइन में लगे हैं लेकिन उनकी याचिका की जल्द सुनवाई की मेंशनिंग का मौका नहीं आया।

दोनों के बीच बातचीत के अंश 

वकील दिनेश : वरिष्ठ वकील कई बार मेंशनिंग करते हैं। जूनियर वकीलों को एक बार भी मौका नहीं मिलता। ये ठीक नहीं है। मेरा मुव्वकिल वरिष्ठ वकील बर्दाश्त नहीं कर सकता। कोर्ट की यही परंपरा थी कि वरिष्ठ वकील अर्जी पर जल्द सुनवाई के लिए मेंशन नहीं करेंगे।

चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा : कोई और परंपरा को नहीं जानता ? सिर्फ आप जानते हैं ? सभी को आपसे सीखना चाहिए ? कृपया उपदेश देना बंद करें

हालांकि बुधवार को चीफ जस्टिस के आदेश से सुप्रीम कोर्ट की वो पुरानी परंपरा वापस आ गई जो जस्टिस वैकेंटचलैया और जस्टिस अहमदी के वक्त प्रचलित थी।

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