*BM साहब की आत्माकथा*
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एक बार एक BM एक ही दिन में अभिकर्ताओं को 201वां फोन करते समय LIC की तरफ से मिले हुऐ मोबाइल की बैटरी फटने से वीरगति को प्राप्त हुआ, उसकी आत्मा जब यमराज के पास पहुँची तो उन्होंने एबीएम से कहा कि हमारे अभिलेखों के अनुसार तुम्हें काफी लंबा जीवन दिया गया था परंतु बीएम बनकर तुमने अपने आप को मौत के मुँह में ढ़केल दिया, इस कारण तुम्हारी मौत आत्महत्या की श्रेणी में गिनी जायेगी और शेष जीवन काल के लिए तुम्हें प्रेतात्मा बनकर भटकना पड़ेगा, परन्तु तुम्हारे परमार्थ के कारण मुझे तुमसे लगाव सा हो रहा है, तुम मुझसे वो स्थान मांग सकते हो जहाँ तुम्हारी आत्मा को स्थायी रूप से रहने दिया जायेगा और तुम्हें दूसरी आत्माओं के द्वारा जगह जगह से खदेड़े जाने के कारण भटकना नहीं पड़ेगा।
दिन, देर रात, संडे, छुट्टी को लगातार ऑफिस में रहने के कारण बीएम साहब की आत्मा को कोई और जगह सुझायी नहीं दी और उन्होंने ऑफिस के बगल वाले पीपल के पेड़ को अपना निवास मांग लिया। यमराज ने गुंडा टाइप आत्माओं को भेज कर उस पीपल पर की अन्य आत्माओं को हटवा कर बीएम साहब की आत्मा को स्थापित करवा दिया।
कुछ दिन शान्त रहने के बाद बीएम साहब के आत्मा के अंदर की बीएम गिरी जोर मारने लगी और उनकी आत्मा ने ऑफिस बंद होने के बाद बेसिक फ़ोन से अभिकर्ताओं को फ़ोन करना शुरू किया, पूरी रात और सुबह ऑफिस खुलने के पहले तक अभिकर्ताओं, ग्राहकों, संभावित ग्राहकों को लगातार फ़ोन करने का सिलसिला चालू हुआ, कोई भी अभिकर्ता पूरी रात सो नहीं पाता था, नींद आने पर बीमा बीमा चिल्लाने लगता था, धीरे धीरे एजेंट्स रातो दिन काम करने लगे, रात में सड़कों पर केवल LIC के एजेंट ही एजेंट दिखाई देने लगे, रात में एजेंट न जगाये इसके लिए लोग बांड की फोटोकॉपी दरवाजे पर चिपकाकर सोने लगे, जिनके पास बीमा नहीं था उन्होंने शहर छोड़ दिया.....
धीरे धीरे ब्रांच का बिज़नेस तेजी से बढ़ने लगा, BM & ABM समझ रहे थे कि विकास अधिकारी मेहनत कर रहे है, और विकास अधिकारी अभिकर्ताओं से फ़ोन वाली बात सुनकर खुश होते थे कि मरने दो सालों को.. हम तो भाग्य लेकर पैदा हुए है, कितनी अच्छी है अपनी संस्था जहाँ एक की कमाई के लिए दूसरा अपना सुख चैन हराम किये हुए है। लेकिन धीरे धीरे इसके दुष्परिणाम सामने आने लगे
काम के बोझ और अतिशय कमाई के नकारात्मक पक्ष प्रकट होने लगे, अनेक विकास अधिकारी जो नॉर्म में चल रहे थे अपना इंसेंटिव देखर पागल से हो गए, कुछ को अमाउंट देख दिल का दौरा पड़ा, अभिकर्ता प्राइज और कमीशन देखकर गश खाने लगे, ABM, BM प्राइज पाकर लाल हो गए, मीटिंग में इतनी माला पहनाई जाने लगी कि उसे संभालने के लिए गर्दन में लोहे का राड़ डलवाना पड़ा , दूसरे ब्रांच के BMOs उनसे जलने लगे, सभी ने मिलकर SDM से निवेदन किया कि सबको बारी बारी से उस ब्रांच में पोस्ट किया जाय, केवल यही लोग मलाई न काटे, एक अभिकर्ता प्रपोजल को सिर पर लाद के आ रहा था, प्रपोजल के भार से गर्दन टूटने से मर गया, कैप्चरर को लकवा मार गया, केशियर एक दिन 2001वीं NB की रसीद काटते समय शहीद हो गया, क्लेम बाबू अपना ही क्लेम करवा बैठे, डेली वेजर ऑफिस छोड़कर भाग गए, PS की मृत्यु दर एक अधिकारी प्रति छमाही हो गयी ........
जब उस ब्रांच के लोगों की अकाल मृत्यु बढ़ी तो यमराज ने कारण जानने के लिए दिवंगत वरिष्ठ अधिकारियों के आत्माओं की एक समिति जाँच के लिये भेजा, उनकी रिपोर्ट से भौचक यमराज ने तुरंत बीएम की आत्मा को लाइन हाज़िर करवाया और आगे ईश्वरीय व्यवस्था धराशयी न हो इसके लिए उन्होंने बीएम के बचे प्रेतात्मा काल को धर्मराज से सिफारिस कर वेव कराया और उसे अगले चैरासी लाख यौनियों में जन्म के लिए प्रस्थान कराया, यकायक उनके मनमें विचार आया कि देखा जाय कि यह अन्य यौनियों में क्या करेगा ........उन्होंने टाइम मशीन चलाया तो देखा कि इसका अगला जीवन कुत्ते का है और यह बीमा न कराये लोगों को दौड़ा दौड़ा के काट रहा है............ सांड के जीवन में बीमा न कराने वालों को सींग से उठा के पटक कर मार रहा है.....सांप बनने पर बिना बीमा वालों को डस रहा है.........घबरा कर उन्होंने टाइम मशीन बंद कर दी और सृष्टि को बचाने का उपाय सोचने लगे, उन्हें लगा कि सिवाय मोक्ष के अन्य कोई उपाय नही है, उन्होंने ईश्वर को सारे तथ्यों से अवगत करा, बीएम की आत्मा को मोक्ष प्रदान करने के जोरदार नोट्स एंड आर्डर बनाया, ईश्वर ने कोई विकल्प न देखते हुए बीएम की आत्मा को मोक्ष स्वीकृत कर दिया।
इस प्रकार जो गति बड़े बड़े संत, महात्माओं, तपस्वियों, त्यागियों की होती है उसे एक बीएम ने प्राप्त किया!
जिन्दगी के साथ भी, जिंदगी के बाद भी।
Source :whatapp
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