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Friday, 3 April 2020

*सामूहिक दीपयज्ञ - रविवार, 5 अप्रैल 2020, समय - रात 9 बजे*

*हम सबके परमप्रिय प्रधानमंत्री जी के आह्वाहन है वैश्विक महामारी को समूल नष्ट करने हेतु अपने घर पर ही दीप जलाएं, आइये हम इसे वैदिक दीपयज्ञ द्वारा सम्पन्न करें, घर की बालकनी में खड़े हो या घर के दरवाजे में खड़े हो।*
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दरिद्रता व कोरोना वायरस रूपी रोग के अंधकार को दूर करने के लिए हो सके तो घी के दीपक या सरसों तेल के दीपक या तिल के तेल का दीपक या मोमबत्ती जलाएं।

सभी की सद्बुद्धि व सद्भावना के लिए, रोगमुक्ति के लिए   गायत्रीमंत्र और महामृत्युंजय मंत्र का मौन मानसिक जप करके भावनात्मक आहुति दें।

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👉🏼 *24 भावनात्मक आहुति गायत्री मंत्र की* - *ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात्।*

भावार्थ:- उस प्राणस्वरूप, दुःखनाशक, सुखस्वरूप, श्रेष्ठ, तेजस्वी, पापनाशक, देवस्वरूप परमात्मा को हम अन्तःकरण में धारण करें। वह परमात्मा हमारी बुद्धि को सन्मार्ग में प्रेरित करे।

👉🏼 *5 या 11 भावनात्मक आहुति महामृत्युंजय मंत्र की* - *ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।*
*उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥*

भावार्थ - हे त्रिनेत्रधारी महादेव, आपकी कृपा से हम भी त्रि-नेत्रीय वास्तविकता का चिंतन करते हैं, दो नेत्रों से बाह्य दृष्टि विकसित करें और  तीसरे नेत्र से विवेकदृष्टि/अन्तः दृष्टि विकसित करें। त्रिगुणात्मक सृष्टि के प्रति गहरी समझ विकसित करें, हे महादेव आपकी कृपा से जीवन हमारा मधुर और परिपूर्णता को पोषित करता हुआ और वृद्धि करता हुआ हो। ककड़ी की तरह, एक फल की तरह हम मृत्यु के समय इसके तने रूपी शरीर से अलग ("मुक्त") हों, और आत्मता की अमरता और शरीर की नश्वरता का हमें सदा भान रहे। मृत्यु से अमरत्व की ओर गमन करें।

👉🏼 *3 भावनात्मक आहुति महाकाली बीज मंन्त्र की* -
ॐ भूर्भुवः स्वः  क्लीं क्लीं क्लीं  तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात् क्लीं क्लीं क्लीं ॐ

👉🏼 *3 भावनात्मक आहुति प्रखर प्रज्ञा श्री सद्गुरु मंन्त्र*-
ॐ प्रखरप्रज्ञाय विद्महे महाकालाय धीमहि। तन्नो श्रीराम: प्रचोदयात्।
👉🏼 *3 भावनात्मक आहुति सजल श्रद्धा माँ भगवती मंन्त्र*-
ॐ सजलश्रद्धाय विद्महे महाशक्तयै धीमहि। तन्नो भगवती प्रचोदयात्।

इसके ततपश्चात गायत्री चालीसा, हनुमान चालीसा, शिव चालीसा, दुर्गा चालीसा, श्रीराम रक्षा श्रोत जो भी पाठ करना चाहें वह करें।

अंत में शांतिपाठ में यह मन्त्र बोलकर घर के भीतर आ जाएं।

*सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामयाः,*
*सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मा कश्चिद् दुःख भाग्भवेत्।*
*ॐ शांतिः शांतिः शांतिः।*

*अर्थ*- "सभी सुखी होवें, सभी रोगमुक्त रहें, सभी मंगलमय घटनाओं के साक्षी बनें और किसी को भी दुःख का भागी न बनना पड़े।" सर्वत्र शांति ही शांति हो।

*ॐ द्यौ: शान्तिरन्तरिक्षँ शान्ति:पृथिवी शान्तिराप: शान्तिरोषधय: शान्ति:।वनस्पतय: शान्तिर्विश्वेदेवा: शान्तिर्ब्रह्म शान्ति:सर्वँ शान्ति:, शान्तिरेव शान्ति: सा मा शान्तिरेधि ॥ॐ शान्ति: शान्ति: शान्ति: ॥*

यजुर्वेद के इस शांति पाठ मंत्र में सृष्टि के समस्त तत्वों व कारकों से शांति बनाये रखने की प्रार्थना करता है। इसमें यह गया है कि द्युलोक में शांति हो, अंतरिक्ष में शांति हो, पृथ्वी पर शांति हों, जल में शांति हो, औषध में शांति हो, वनस्पतियों में शांति हो, विश्व में शांति हो, सभी देवतागणों में शांति हो, ब्रह्म में शांति हो, सब में शांति हो, चारों और शांति हो, शांति हो, शांति हो, शांति हो।


🙏🏻श्वेता चक्रवर्ती
डिवाइन इंडिया यूथ असोसिएशन

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