"आज, पेंशनभोगी एक शांतिपूर्ण जीवन जी रहे हैं, और हमें समय पर पेंशन मिल रही है। इसके पीछे एक महान व्यक्ति का हाथ है जिन्होंने इसे संभव बनाया – डी.एस. नकारा। उनकी पुण्यतिथि पर, हम उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं 🌷 नकारा का जन्म 8 अप्रैल, 1914 को मुंबई में हुआ था। उन्होंने 1937 में सिविल सेवा परीक्षा उत्तीर्ण की और केंद्र सरकार की रक्षा लेखा सेवा (Defence Accounts Service) में शामिल हो गए 🌷 1977 से पहले, सेवानिवृत्त लोग बहुत कम पेंशन के साथ एक दयनीय जीवन जी रहे थे। 1979 में, केंद्र सरकार ने एक उदार पेंशन योजना की घोषणा की, लेकिन यह केवल उन लोगों पर लागू थी जो उस समय भी सेवा में थे। यह उन लोगों के लिए एक अभिशाप जैसा था जो पहले ही सेवानिवृत्त हो चुके थे 🌷 नकारा ने इस स्थिति को देखा और सर्वोच्च न्यायालय में एक जनहित याचिका दायर की। सर्वोच्च न्यायालय की पीठ ने 17 दिसंबर, 1982 को एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया 🌷 इस फैसले में कहा गया कि पेंशन एक अधिकार है, और पेंशनभोगियों को भी सरकारी कर्मचारियों की तरह ही समान रूप से DA/DR (महंगाई भत्ता/राहत), स्वास्थ्य लाभ और मृत्यु-मुआवजा दिया जाना चाहिए 🌷 फैसले में यह भी कहा गया कि पेंशन सरकार के विवेक पर निर्भर नहीं है, बल्कि यह पिछली सेवाओं के लिए एक प्रतिफल है। पेंशन बुढ़ापे में गरीबी से बचाने का एक साधन है 🌷 नकारा के प्रयासों के कारण ही यह महान फैसला संभव हो पाया। वे पेंशनभोगियों के लिए किसी देवता के समान हैं और उन्हें हमेशा याद किया जाएगा 🌷 इस ऐतिहासिक फैसले की याद में, हम पूरे देश में 17 दिसंबर को 'पेंशनभोगी दिवस' (Pensioners' Day) के रूप में मनाते हैं। हम नकारा के योगदानों को याद करते हैं 🌷 नकारा 95 वर्ष तक जीवित रहे और 29 जुलाई, 2009 को उनका निधन हो गया। एक पेंशनभोगी के तौर पर, मैं उन्हें अपनी गहरी श्रद्धांजलि अर्पित करता हूँ 🌹 मुझे उम्मीद है कि मेरे सभी मित्र इस संदेश को अपने-अपने ग्रुप्स में साझा करेंगे 🙏"
Thursday, 11 June 2026
D S NAKARA डी.एस. नकारा। उनकी पुण्यतिथि पर, हम उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं 🌷
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