*लो जी बहुत ही काम की बात* 🙏🙏🙏
👉 साइरस मिस्त्री कार की पिछली सीट पर बैठा था। गाड़ी में कुल 4 लोग थे। आगे बैठे हुए दोनों लोग बच गए। क्योंकि उन्होंने सीट बेल्ट लगाई हुई थी लेकिन पीछे बैठने वाले आमतौर पर सीट बेल्ट नहीं लगाते। जिससे बढ़िया से बढ़िया कार का सेफ्टी सिस्टम भी उनकी मदद नहीं कर पाता। क्योंकि एक्सीडेंट के केस में बैलून तभी खुलेगा। जब उस सीट पर बैठी हुई सवारी ने सीट बेल्ट लगाई हुई है। आगे तो हम जुर्माने के डर से भी सीट बेल्ट लगा लेते हैं, पर बढ़िया गाड़ियों में सेफ्टी के बड़े महंगे सिस्टम लगे हुए हैं और हम उनका उनका लाभ नहीं ले पाते हैं, यह कुछ वैसा ही है, जैसे टू व्हीलर पर चलते हुए हेलमेट ना लगाना।
कृपया ध्यान दें, जब भी गाड़ी हाईवे पर चलाएं, तब तो जरूर से जरूर सभी सवारी सीट बेल्ट लगा कर ही चलें। सेफ्टी बैलून इंपैक्ट से ही खुलता है और सवारी की जान बचाता है। वह साथ-साथ ही पंचर भी हो जाता है ताकि बचे हुए व्यक्ति का दम ना घुट जाए। एक्सीडेंट के टाइम पर 40 गुना तक की फोर्स पैदा होती है यानी 80 किलो का आदमी 3200 किलो का इंपैक्ट सामने की तरफ देता है। फ्रंट सीट पर यदि बेल्ट नहीं लगाई है, तो सेफ्टी बैलून नहीं खुलेगी और बंदा विंडस्क्रीन से सामने की तरफ बाहर आ जाएगा तथा पीछे वाला बंदा आगे वाली सीट पर 3200 किलो की फोर्स से टकराएगा, जो स्वयं के साथ-साथ अगली सीट पर बैठे व्यक्ति के लिए भी खतरनाक है। इसलिए याद रखें, कि गाड़ी में बैलून हैं तो उनका लाभ तभी होगा, जब सीट बेल्ट लगी हुई हो। धन्यवाद।
वीरेंद्र गर्ग (दिल्ली इंस्टिट्यूट ऑफ़ फायर इंजीनियरिंग) फायर एंड सेफ्टी ट्रेंनिंग इंस्टीट्यूट (द्वारका)
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