एक प्यारी सी कविता.. वक़्त पर !
~ " वक़्त नहीं " ~
हर ख़ुशी है लोंगों के दामन में ,
पर एक हंसी के लिये वक़्त नहीं !
दिन रात दौड़ती दुनिया में ,
ज़िन्दगी के लिये ही वक़्त नहीं !
सारे रिश्तोंको तो हम मार चुके ,
अब उन्हें दफ़नाने का भी वक़्त
नहीं !
सारे नाम मोबाइल में हैं ,
पर दोस्ती के लिये वक़्त नहीं !
गैरों की क्या बात करें ,
जब अपनों के लिये ही वक़्त नहीं !
आखों में है नींद भरी ,
पर सोने का वक़्त नहीं !
दिल है ग़मो से भरा हुआ ,
पर रोने का भी वक़्त नहीं !
पैसों की दौड़ में ऐसे दौड़े ,
कि थकने का भी वक़्त नहीं !
पराये एहसानों की क्या कद्र करें ,
जब अपने सपनों के लिये ही वक़्त नहीं !
तू ही बता ऐ ज़िन्दगी ,
इस ज़िन्दगी का क्या होगा ,
कि हर पल मरने वालों को ,
जीने के लिये भी वक़्त नहीं !