khush raho
श्री रवि शंकर जी द्वारा रचित एक सुंदर कविता...🐋
छोटी सी जिंदगी है ,
हर बात में खुश रहो।
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जो पास में ना हो ,
उनकी आवाज़ में खुश रहो।
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कोई रूठा हो तुमसे ,
उसके इस अंदाज़ में खुश रहो।
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जो लौट के नही आने वाले है,
उन लम्हो कि याद में खुश रहो।
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कल किसने देखा है ,
अपने आज में खुश रहो।
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खुशियों का इन्तेजार किसलिए ,
दुसरो कि मुस्कान में खुश रहो।
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क्यूँ तड़पते हो हर पल किसी के साथ को ,
कभी तो अपने आप में खुश रहो।
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छोटी सी जिंदगी है ,
हर हाल में खुश रहो।
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आँखे' कितनी अजीब होती है,
जब उठती है तो दुआ बन जाती है,
जब झुकती है तो हया बन जाती है,
उठ के झुकती है तो अदा बन जाती है
झुक के उठती है तो खता बन जाती है,
जब खुलती है तो दुनिया इसे रुलाती है,
जब बंद होती है तो दुनिया को ये रुलाती है...!!
"हर रिश्ते में विश्वास रहने दो;
जुबान पर हर वक़्त मिठास रहने दो;
यही तो अंदाज़ है जिंदगी जीने का;
न खुद रहो उदास, न दूसरों को रहने दो..!"
Thursday, 28 January 2016
KHUSH RAHO
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